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Showing posts from August, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

'इंडिया टुडे' के संपादक राज चेंगप्पा अपनी किताब 'वेपन ऑफ़ पीस' में लिखते हैं, "परमाणु बम बनाने के मुद्दे पर विक्रम साराभाई और होमी भाभा के विचार बिल्कुल नहीं मिलते थे. भाभा की मृत्यु के पांच महीने बाद जब उन्होंने परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख का काम संभाला तो उन्होंने सबसे पहले भारत के नए-नए परमाणु बम कार्यक्रम को समाप्त करने की तैयारी शुरू कर दी. परमाणु वैज्ञानिक राजा रामन्ना याद करते हैं कि साराभाई का मानना था कि हथियार के रूप में परमाणु बम बेकार की चीज़ है. वो सिर्फ़ एक कागज़ी शेर है. परमाणु बम के प्रति साराभाई की इस सोच से मोरारजी देसाई बहुत खुश हुए. कई साल बाद जब वो प्रधानमंत्री बन गए तो उन्होंने राजा रामन्ना से कहा, "साराभाई समझदार लड़का था. वो पागल भाभा तो पूरी दुनिया को उड़ा देना चाहता था." जब विक्रम के सामने भाभा का ये तर्क रखा गया कि परमाणु बम बनाने में बहुत कम ख़र्च होगा तो उनका जवाब था, "आप मुझसे पूछ सकते हैं कि दो गज़ कपड़े की कीमत क्या होगी? लेकिन ये दो गज़ कपड़ा बग़ैर किसी करघे या मिल के तो बनाया नहीं जा सकता." मल्लिका ...